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Lok Sabha Debates
Regarding Atrocities On Dalits. on 12 March, 2003



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 14.06 ½ hrs. 

Title: Regarding atrocities on Dalits. 

MR. SPEAKER: We will take up an important discussion regarding atrocities on dalits. There are two names – Shri Ramji Lal Suman and Shri Ram Vilas Paswan.

Shri Ramji Lal Suman may please initiate.

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): अध्यक्ष महोदय, मैं आपका धन्यवाद प्रकट करता हूं कि आज आपने देश में दलितों पर हो रहे अत्याचार पर चर्चा कराए जाने की व्यवस्था दी। एक लम्बे अर्से से दलितों पर हो रहे अत्याचार पर सदन में चर्चा नहीं हुई।

आपको स्मरण होगा कि पिछले सत्र के दौरान जब श्री प्रमोद महाजन संसदीय कार्य मंत्री थे, उन्होंने आपसे वार्ता करके यह सुनिश्चित किया था कि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर चर्चा के तत्काल बाद दलितों पर अत्याचार के सवाल पर चर्चा करायी जाएगी लेकिन यहां प्राथमिकताएं कुछ और भी रहीं। मैं समझता हूं कि वे प्राथमिकताएं कम नहीं थीं। इसलिए आज हम इस पर चर्चा कर रहे हैं।

आजादी के ५२-५३ वर्ष बाद भी दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं जो अत्यधिक चिन्ता और लज्जा का विषय है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जिस दिन दलित अत्याचार की कोई न कोई खबर किसी समाचार पत्र में प्राथमिकता के साथ न आती हो। डरबन सम्मेलन के पूर्व और बाद में हमारी सरकार और समाज ने ऐलान कर दिया कि अस्पृश्यता नाम की कोई चीज हमारे देश में नहीं है और वह समाप्त हो गई है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति अत्याचार निवारण अधनियम हमारे देश में है। मेरे कहने का मतलब यह है कि कानून के जरिए किसी समस्या का अंत नहीं हो सकता है। यहां सवाल हमारी मनोवृत्ति का है, हमारी सोच का है, हमारे संस्कारों का है, हमारी जहनियत का है, हमारे तौर-तरीकों का है। आज जो कुछ पूरे देश में हो रहा है, उसके पीछे हमारी मनोवृत्ति है। कुछ लोग अभी भी अपनी मनोवृत्ति से समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और बदलते संदर्भ में नये सिरे से सोचने के लिये तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि आज दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। जहां तक आंकड़ों का सवाल है, राज आंकड़ों से नहीं चलता। पं. जवाहर लाल नेहरू के जमाने से लेकर भारत सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री डा. सम्पूर्णानन्द के जमाने से लेकर उ. प्र. की हर राज्य सरकार अपनी उपलब्धियों के बारे में बखान करती रही है। आंकड़ों के आधार पर कोई प्रधान मंत्री या मुख्यमंत्री यह साबित कर देगा कि उन से बढ़कर अच्छी सरकार किसी ने नहीं चलाई। सरकार के बारे में तो जनता ही जानती है कि वह किस प्रकार चल रही है। एक आम आदमी जो उसके बारे में सोचता है, उसके बारे में भाषा बोलता है। यही वह पैमाना है जिसके जरिये सरकार के बारे में सोचा जा सकता है। आज वही काम इस देश में हो रहा है। दलितों पर अत्याचार होने की घटनायें बढ़ रही हैं। मैंने और हमारे वरिष्ठ सहयोगी श्री राम विलास पासवान जी ने झज्जर में गत दिनों जो हुआ…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय, यह बात ठीक नहीं। इन लोगों को पूरी बात कहने का मौका मिलेगा, पहले मेरी बात सुनें। मैं दूसरी बात कह रहा हूं कि वहां जो कुछ हुआ, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं उस बात का उल्लेख इसलिये करना चाहता था कि जब ९ दिसम्बर को सरकार की ओर से गृह मंत्री जी ने बयान दिया तो कहा कि दलितों पर होने वाले अत्याचार की घटनाओं में कमी आई है जबकि २९ नवम्बर को इसी सदन में सामाजिक अधिकारिता विभाग के मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार दलितों पर होने वाले अत्याचारों की घटनायें बढ़ रही हैं। अध्यक्ष महोदय, एक ही सरकार के दो मंत्रियों के बयानों में इस प्रकार का विरोधाभास हो- एक मंत्री कहता है कि दलितों पर होने वाले अत्याचारों में कमी आई है, दूसरा कहता है कि दलितों पर होने वाले अत्याचारों में बढ़ोत्तरी हो रही है, मैं समझता हूं कि यह चिन्ता का विषय है। सरकार की दिलचस्पी इस ओर नहीं है।

अध्यक्ष महोदय, यहां झज्जर के सवाल का जिक्र किया गया। सवाल इस बात का नहीं कि यह घटना झज्जर में हुई या किसी दूसरी जगह हुई लेकिन इन घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। यद्यपि मैं झज्जर के बारे में कुछ कहना नहीं चाहता लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जब राज्य की परिकल्पना की गई, राज्य क्यों बना, राज्य के बनने की क्या आवधारणा थी, उसके पीछे एक यही उद्देश्य था कि कोई किसी की सम्पति न लूटे, न जान ले, समाज में अराजकता न फैले, इसलिये हमने समाज को नियंत्रित करने के लिये इस तंत्र को विकसित किया। झज्जर में जो कुछ हुआ, पुलिस चौकी या थाने के सामने आम आदमी को जबरन मार डाला गया और पुलिस मौके पर मूकदर्शक बनी रही। अगर प्रशासन की शक्ति का इस्तेमाल किया होता, आंसू गैस छोड़ी गई होती, हवाई फायरिंग हुई होती तो स्थिति बदल सकती थी। झज्जर की घटना कोई मामूली घटना नहीं थी। जिस तरह से ५ लोगों को मार दिया गया, वह गंभीर सवाल है। दिनांक ९ दिसम्बर को भारत के गृह मंत्री जी ने झज्जर के संबंध में जो बयान दिया, उसका सत्यता से कोई संबंध नहीं है।

सिर्फ एक हवा बांधी गई, गोकशी के नाम पर एक गलत खबर फैलाई गई। जब हरियाणा के मुख्य मंत्री जी ने कहा कि जिस गोकशी की बात की जा रही है, उसकी स्वाभाविक मौत हुई थी और उस स्वाभाविक मौत का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। …( व्यवधान)

कैप्टन (सेवानिवृत्त) इन्द्र सिंह (रोहतक): आप तथ्यों को तोड़-मरोड़कर गलत ढंग से पेश कर रहे हैं। वहां दलित और गैर दलित का कोई सवाल नहीं था। आप सिर्फ वोट की राजनीति के लिए ऐसा कर रहे हैं। वहां जो घटना घटी वह अकस्मात थी।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : यदि गलत हो तो आप अपने भाषण में कहिये।

श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, इस तरह से मेरा बोलना मुश्किल हो जायेगा। मैं आपका संरक्षण चाहता हूं।

अध्यक्ष महोदय : इसलिए मैं उन्हें कह रहा हूं कि आपको जो कुछ कहना है वह अपने भाषण के समय कहिये।

श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, जो कुछ हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि जिन लोगों के जिम्मे हमारे संरक्षण का काम है। पुलिस का काम हम लोगों को संरक्षण देना है। लेकिन अगर वहां पुलिस चौकी से खींचकर लोगों को पुलिस चौकी के सामने जलाकर मारा डाला जाए तो मैं समझता हूं कि इससे ज्यादा गंभीर घटना कोई दूसरी नहीं हो सकती है।

जहां तक दलित अत्याचारों का सवाल है, दलितों की समस्याओं के लिए हमने अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग बनाया। लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उस आयोग की रिपोर्ट पर सदन में कभी चर्चा नहीं होती। काफी परिश्रम के बाद वह रिपोर्ट बनाई जाती है। लेकिन हम लोग चर्चा नहीं करते। वर्ष १९९८-१९९९ की रिपोर्ट सभा पटल पर रख दी गई है। लेकिन वर्ष २००० की छठवीं रिपोर्ट राष्ट्रपति जी के पास पहुंचा दी गई है, लेकिन सदन के सभा पटल पर नहीं रखी गई है। मेरा आपसे आग्रह है कि आगे आने वाले समय में इस रिपोर्ट पर चर्चा जरूर होनी चाहिए। जब तक अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं होगी, तब तक मैं नहीं समझता कि दलित कल्याण एवम् जनकल्याण के कोई अच्छे परिणाम हम लोग निकाल पायेंगे। जहां तक दलितों पर अत्याचारों का सवाल है, वर्ष २००० के आंकड़े मेरे पास हैं। वर्ष २००० में महाराष्ट्र में ९०६७, राजस्थान में ८२४७, कर्नाटक में ५९२३, उड़ीसा में ५८८७, तमिलनाडु में २९२१, केरल में २१८६ और उत्तर प्रदेश में ७७९६३ दलितों पर अत्याचार हुए। उत्तर प्रदेश में ७७९६३ अपराध पंजीकृत हुए। दलितों के ऊपर होने वाले अत्याचारों में अगर कोई अव्वल प्रदेश है तो वह उत्तर प्रदेश है। सवाल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हमारी जाति क्या है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हम सोचते क्या हैं। हमारा काम करने का तरीका क्या है। लोगों का लक्ष्य सिर्फ सरकार चलाना है, मैंने आपसे पहले भी निवेदन किया था कि सरकार कितनी चली है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, जितने भी दिन सरकार चली है, उस सरकार ने जनकल्याण के कार्य किये हैं या नहीं किये हैं, यह महत्वपूर्ण है। सरकार चार दिन चले या ४० दिन, लेकिन सरकार चलने की दिशा सार्थक होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में एक सूत्री कार्यक्रम है कि किसी तरह से सरकार चलनी चाहिए।

अध्यक्ष महोदय, दसवीं पंचवर्षीय योजना का जो प्रारूप बना है, मैं उसके सिलसिले मैं कहना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश में जो अपराध पंजीकृत हुए हैं, उनमें सिर्फ ३९ प्रतिशत पंजीकृत अपराधों की जांच हुई है, शेष अपराधों की जांच नहीं हुई है और उत्तर प्रदेश में जो वर्ष २००० में ७७९६३ अपराध पंजीकृत हुए हैं, उनमें सिर्फ ३६६० केसिज का सिर्फ निस्तारण हुआ है।

५९२ केसेज़ में सिर्फ सज़ा हुई और ३०६८ केस कोर्ट से बरी हुए। दलितों पर अत्याचार होने से संबंधित मामलों को निपटाने की यह दर है। कुल मिलाकर स्थिति ठीक नहीं है। मैं समझता हूँ कि यह किसी एक दल का सवाल नहीं है। इन सब सवालों पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अध्यक्ष महोदय, मैंने अभी हरियाणा का ज़िक्र किया। न सिर्फ हरियाणा, बल्कि हर जगह से दलितों पर अत्याचार के समाचार आते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर से ६० किलोमीटर की दूरी पर फागी तहसील में चकबारा में तालाब में नहाने के सवाल पर दलितों पर अत्याचार हुआ। ५ सितम्बर २००२ को तमिलनाडु के जिला डिंडिगुल के गांव कोण्डमपट्टी के शंकर दलित को पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया। आज ही समाचार छपा है जनसत्ता में कि मुरैना जिले के कचनौदा गांव में १६ वर्षीय किशोरी को अकेला पाकर उसके साथ बलात्कार किया गया और जब उसके परिवार के लोग थाने में अपराध दर्ज करा आए तो उन्हें धौंस दी गई कि तुमने अपराध दर्ज कराकर ठीक नहीं किया। उसके बाद मुल्ज़िम के बाप ने उस लड़की को अकेला पाकर उसकी हत्या कर दी जिसने बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था। मैंने उत्तर प्रदेश का ज़िक्र खास तौर से आपसे किया। ८ दिसम्बर को अंबेडकर इंटर कालेज मेरठ में हिन्दू आतंकवाद विरोधी रैली का आयोजन था। पंडाल लगा हुआ था और लोग अपनी बात कहना चाहते थे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के नौजवान यहां से वहां गए। इन लोगों ने पंडाल तोड़ा, माइक तोड़ा और बाबा अंबेडकर तथा महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर फाड़ दी। वहां जाकर उत्पात मचाया। सबसे पहले पुलिस ने जब देखा कि इनका व्यवहार ठीक नहीं है तो भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को खदेड दिया लेकिन बाद में सरकार के दबाव में, सरकार के एक मंत्री के कहने पर जो बेगुनाह और बेकुसूर लोग थे, जो शांति से अपनी बात कहना चाहते थे, उन्हीं लोगों के खिलाफ देशद्रोह से लेकर कोई संगीन अपराध ऐसा नहीं बचा जो दलितों के खिलाफ दर्ज न हुआ हो।

१४.२२ hrs.( Mr. Deputy Speaker in the Chair) उपाध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के क्षेत्र में एक दलित महिला अंजु के साथ बलात्कार हुआ। उसमें दो मुल्ज़िम थे। एक मुल्ज़िम को जेल भेज दिया गया और जो दूसरा मुल्ज़िम था कृपाल सिंह, उसको इसलिए जेल नहीं भेजा गया कि वह बसपा के जिलाध्यक्ष का भाई था। तीन-चार महीने हो गए लेकिन वह सत्तारूढ़ दल की पार्टी के जिलाध्यक्ष का भाई है इसलिए उसके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ५ सितम्बर, २००२ को हरौड़ा विधान सभा क्षेत्र के गंगलहेड़ी थाना के गांव रसूलपुर में बलात्कार हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई। बड़ौत बागपत में दलितों की ३० बीघा गन्ने की फसल और झोपड़ियां फूंक डालीं। यह ७ नवंबर की घटना समाचार-पत्रों में छपी है। मेरठ के हर्दा गांव के दलितों के पट्टों पर ज़बरन कब्ज़ा कर लिया गया मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में जंगल राज चल रहा है। नौएडा में २४ अगस्त की घटना है। दनकौर थाना क्षेत्र के गांव औरंगाबाद में १ अगस्त को श्यामी की पत्नी श्रीमती राजन देवी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई और रिपोर्ट तक नहीं लिखी गई।

उपाध्यक्ष महोदय ये घटनाएं निरन्तर हो रही हैं। दिनांक ०८-११-२००२ को मुजफ्फरनगर में पुगाना थाना क्षेत्र के गांव डूंगरपुर में ऋषिपाल की सुपुत्री कमला की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई। पुलिस में रिपोर्ट लिखाई गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। बालिका के साथ बलात्कार होने की पुष्टि हुई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस फर्जी मुठभेंड़ करने में भी सबसे आगे है। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस इंसान बने। आज उत्तर प्रदेश के दलित अपने को सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहां की मुख्य मंत्री का केवल एक सूत्रीय कार्यक्रम सरकार चलाना है जिसके कारण वहां दलितों की घोर उपेक्षा हो रही है। उनके साथ कोई न्याय नहीं हो रहा है।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपकी मार्फत एक निवेदन और करना चाहूंगा कि जब इस सदन में धर्म परिवर्तन का प्रश्न आता है, तो बड़ा हल्ला होता है, लेकिन मैं अपने मित्रों से यह पूछना चाहूंगा कि धर्म परिवर्तन के मूल में क्या है, पहले इसको जानिए। कल, परसों विनय कटियार जी यहां बैठे हुए थे, आज नहीं हैं, वे अम्बेडकर को पढ़ रहे थे। मायावती के खिलाफ जब कभी कोई बयान देना होता है, तो वे अम्बेडकर के ही माम का उल्लेख करते हैं, यह बात अलग है कि जब वाजपेयी जी डांट देते हैं, तो दुबारा बयान देने की हिम्मत नहीं करते, उन्होंने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि जनता धर्म-परिवर्तन क्यों करती है। यह वर्ण-व्यवस्था, यह छुआछूत और यह सामाजिक विषमता,…( व्यवधान)

श्री दिग्विजय सिंह जी, स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द और महात्मा गांधी जी ने कहा था कि यदि हिन्दू धर्म, समानता का धर्म नहीं बन सकता है, तो मैं चाहूंगा कि यह धर्म नष्ट हो जाए। आज जो कुछ हो रहा है और आरोप लग रहे हैं कि धर्म-परिवर्तन हो रहा है, मिशनरीज धर्म-परिवर्तन करा रही हैं। कभी आपने अपने आप से पूछा कि आपका व्यवहार कैसा है, आप क्या कर रहे हैं ?

उपाध्यक्ष जी, मुझे हरियाणा के माननीय सांसद माफ करें, मैं एक प्रार्थना करना चाहूंगा कि क्या कभी आपने झज्झर में जब पांच दलित मारे गए, तो विश्व हिन्दू परिषद््, आर.एस.एस. और बजरंग दल के लोग जश्न क्यों मनाते हैं और यह क्यों कहते हैं कि हम उन लोगों को पुरस्कृत करेंगे जिन्होंने पांच दलितों को मारा है। …( व्यवधान)

श्री रामचन्द्र बैंदा (फरीदाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य बिलकुल गलत बोल रहे हैं। न आर.एस.एस. और न विश्व हिन्दू परिषद्, किसी ने कोई जश्न नहीं मनाया। माननीय सदस्य को इस प्रकार की गलत बात कहने से रोका जाना चाहिए।…( व्यवधान)

संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चीखलीया) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को ऐसी गलत इन्फर्मेशन हाउस में नहीं देनी चाहिए। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : रामजी लाल सुमन जी, यह बहुत गम्भीर मामला है। आप इस विषय में कंट्रोवर्सी मत लाइए। आप सब्जैक्ट पर बोलिए।

श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष महोदय, मैं स्वयं कह रहा हूं कि यह बहुत गम्भीर मामला है। यह समाचार सभी समाचारपत्रों में छपा है कि वहां जश्न मनाए गए, जो कातिल थे, उनको बचाने का काम किया गया और यह कहा गया कि हम उनको पुरस्कृत करेंगे, उनको शाबाशी देंगे।

उपाध्यक्ष महोदय, ईसाई के मरने के बाद, दलित के मरने के बाद, यदि जश्न मनाया जाएगा, खुशी मनाई जाएगी, तो इस देश में धर्म-परिवर्तन होने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। यह कुछ लोगों के कुकर्मों का फल है। इसके अलावा कोई दूसरा कारण नहीं है। यह हालत हमारे देश में है और मुझे माफ करेंगे, उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री, मायावती के क्षेत्र हरोड़ा में ३० दलित परिवारों ने धर्म-परिवर्तन कर लिया है। और पूरे देश में यह सिलसिला चल रहा है।